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28 वर्ष बाद आज छठ पूजा पर शनि-चंद्र युति में रवि योग संयोग
उज्जैन | 28 वर्ष के बाद गुरुवार को छठ पूजा के दिन शनि-चंद्र की युति में रवि योग का संयोग बना रहा है। छठ पूजा चूंकि सूर्य की उपासना का पर्व है और इस दिन रवि योग का संयोग बनने से पर्व में पूजा का महत्व कई गुना अधिक बढ़ जाएगा। उत्तर भारतीय परिवार शिप्रा के रामघाट पर गोधूलि बेला में डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए उमड़ेंगे। छठ उत्तर भारतीयों का सबसे बड़ा त्योहार है। मुख्य रूप इसमें परिवार की महिलाएं नदी या सरोवर के किनारे पुत्र की दीर्घायु की कामना से सूर्य की पूजा कर जल चढ़ाती हैं। उत्तर भारत के क्षेत्रों से उज्जैन में आकर रह रहे लोग यह पर्व रामघाट और कोठीरोड स्थित विक्रम सरोवर पर मनाएंगे। ज्योतिषाचार्य पं. अमर डिब्बावाला ने बताया सन् 1989 में पूर्वा अषाढ़ा नक्षत्र के साथ शनि का धनु राशि में परिभ्रमण काल होने पर यह संयोग बना था। इस वर्ष भी गुरुवार को कार्तिक शुक्ल की छठ पर शनि मार्गी होकर वृश्चिक से धनु राशि में प्रवेश करेंगे। चंद्रमा भी इस दिन धनु राशि में रहेंगे। नक्षत्र गणना अनुसार इस दिन रवि योग है, जो सूर्याेदय 6.32 से रात 11.52 तक रहेगा। इस योग में पूजा-पर्व मनाना पुण्यकारी होगा।
चार दिनी छठ पर्व के दूसरे दिन बुधवार को उत्तर भारतीय परिवारों में खरना हुआ। इसमें व्रत रखने वालों ने चावल से बनी खीर व गुड़ का प्रसाद ग्रहण किया। तीसरे दिन निर्जल व्रत रखकर डूबते सूर्य को शाम के वक्त जल अर्पित करेंगे व चौथे रोज ब्रह्ममुहूर्त में उगते सूर्य की पूजा की जाएगी।