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7 कैमरे और 2 मेटल डिटेक्टर:फिर भी पिस्टल के साथ नेता मंदिर के अंदर
उज्जैन:आम से लेकर खास तक प्रत्येक दर्शनार्थी को महाकालेश्वर मंदिर के अंदर सुरक्षा घेरों से होकर पहुंचना होता है, लेकिन कल भगवान की सवारी के ठीक पहले कांग्रेस नेता कमर में पिस्टल लगाकर सभामंडप तक पालकी के पास पहुंच गये और पुलिस प्रशासन के अधिकारी उनके खिलाफ कार्रवाई तो दूर नाम तक उजागर नहीं कर पाये हैं।
महाकाल सवारी के पहले मंदिर में स्थित सभामंडप में पालकी पूजन होता है। पूजन में कलेक्टर, एसपी सहित वीआईपी मौजूद रहते हैं। सोमवार को पालकी पूजन के पहले का एक वीडियो वायरल हुआ। इसमें एक नेता कमर में पिस्टल लगाकर मंदिर में दिख रह है। सोशल मीडिया पर लोग इस व्यक्ति को कांग्रेस नेता रवि शुक्ला बता रहे है। खास बात यह कि रवि शुक्ला उसी रंग के कपड़ों में रामघाट पर भी कमर में पिस्टल लगाए दिखे गए।
ऐसे होता है वीआईपी का प्रवेश
मंदिर प्रशासन द्वारा अतिविशिष्ट लोगों को मंदिर धर्मशाला से प्रवेश दिया जाता है। यहां एक मेटल डिटेक्टर लगा है जिससे संदिग्ध वस्तु अथवा सामान को मशीन ट्रेस कर बीप बजती है। सभी लोगों को इस मशीन के नीचे से निकलना अनिवार्य होता है। इसके बाद व्यक्ति प्रवचन हॉल तक पहुंचता है। यहां भी एक मेटल डिटेक्टर लगा है और इसके नीचे से व्यक्ति को निकलकर कोटितीर्थ कुंड होते हुए सभा मंडप तक पहुंचना होता है। वीआईपी प्रवेश वाले इस मार्ग पर पहली इंट्री से लेकर सभा मंडप तक 7 कैमरे लगे हैं और इस मार्ग की निगरानी महाकाल पुलिस चौकी व कंट्रोल रूम में मौजूद पुलिस व मंदिर प्रबंध समिति के अधिकारी मंदिर खुलने से लेकर पट बंद होने तक लगातार करते हैं।
एक मशीन बंद, दूसरी पर गार्ड नहीं
ड्डअतिविशिष्ट लोगों के प्रवेश द्वार पहली लगी पहली मशीन चालू है लेकिन लोगों को इसके अंदर से गुजारने व संदिग्ध वस्तु पकड़ाने पर चैकिंग के लिये कोई गार्ड मौजूद नहीं है। दूसरी मशीन बंद पड़ी और यहां भी कोई गार्ड मौजूद नहीं है, लेकिन इस मार्ग के सभी कैमरे चालू हालत में हैं। अधिकारी यदि मंदिर में प्रवेश से लेकर सभा मंडप तक के सीसीटीवी कैमरों के फुटेज चैक करे तो पिस्टल लेकर प्रवेश करने वाले कांग्रेस नेता की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
भीड़ बढऩे पर पुलिस के हाथ में रहती है व्यवस्था
महाकाल मंदिर में प्रवेश के दौरान गेट पर खड़े तीन प्रकार के कर्मचारियों से सामना होता है। प्रत्येक गेट पर मंदिर समिति, पुलिसकर्मी और होमगार्ड के जवान मौजूद रहते हैं, लेकिन भीड़ बढऩे पर मंदिर की पूरी व्यवस्था स्वत: पुलिसकर्मियों के हाथ में आ जाती है। सोमवार को भी पालकी पूजन से पहले अतिविशिष्ट प्रवेश द्वार पर पुलिस अधिकारियों के अलावा होमगार्ड एसआई रूबी यादव ड्यूटी कर रही थीं।