- बसंत पंचमी पर सांदीपनि आश्रम में विद्यारंभ संस्कार, भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षास्थली में गूंजे पहले अक्षर
- बसंत पंचमी पर महाकाल दरबार पीले रंग में सजा, आज से होली तक रोज अर्पित होगा गुलाल
- महाकाल मंदिर में गूंजा ‘जय श्री महाकाल’, भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब; शेषनाग मुकुट और रजत मुण्ड माला में सजे बाबा महाकाल
- बसंत पंचमी पर वासंती रंग में रंगेगा महाकाल मंदिर, भस्म आरती से होगी शुरुआत; सांदीपनि आश्रम में भी होंगे विशेष धार्मिक आयोजन!
- वीरभद्र जी के कान में स्वस्ति वाचन के बाद ली गई आज्ञा, पंचामृत अभिषेक और भस्म अर्पण के साथ साकार रूप में भगवान ने दिए दर्शन
कालिदास समारोह
कालिदास समारोह एक सांस्कृतिक-साहित्यिक सम्मेलन है जो भारत के मध्य प्रदेश राज्य के उज्जैनउज्जैन नगर में प्रतिवर्ष कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवप्रबोधिनी एकादशी) को आयोजित होता है।वर्तमान रूप में कालिदास समारोह का आरम्भ सन् १९५८ से हुआ। इसकी परिकल्पना स्वर्गीय [[पंण्डित सूर्यनारायण व्यास]] के द्वारा की गयी थी जो तीस के दशक से ही उज्जैन में “कालिदास जयन्ती” का आयोजन करते आ रहे थे।
सन् १९७९ में मध्य प्रदेश सरकार ने उज्जैन में [[कालिदास अकादमी]] की स्थापना की जो [[विक्रम विश्वविद्यालय]] के साथ मध्य-प्रदेश के संस्कृति मंत्रालय के सहायता से इसे प्रतिवर्ष आयोजित करता है।
कालिदास समारोह तीन अलग-अलग चरणों में मनाया जाता है। इसका प्रमुख आकर्षण है संस्कृतनाटक और शास्त्रीय नृत्य। सात दिन तक संस्कृत नाटकों और शास्त्रीय नृत्य का प्रदर्शन होता है। इसके अलावा देश भऱ के विद्वान संस्कृत साहित्य और कालिदास को लेकर शोध पत्रों का वाचन करते हैं। विश्वविद्यालयीन स्तर पर संस्कृत वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है जिसमें देश भर के संसकृत छात्र-छात्राएं भाग लेने आते हैं। इस वाद विवाद प्रतियोगिता के उच्च स्तर का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि किसी जमाने में इसमें प्रतियोगी की हैसियत से बाग लेने आने वाले छात्र आज किसी विश्वविद्यालय में संस्कृत के प्राध्यापक की हैसियत से इसमें निर्णायक की भूमिका में बैठे नजर आते हैं।
कालिदास समारोह एक सांस्कृतिक-साहित्यिक सम्मेलन है जो भारत के मध्य प्रदेश राज्य के उज्जैन नगर में प्रतिवर्ष कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवप्रबोधिनी एकादशी) को आयोजित होता है।कालिदास समारोह तीन अलग-अलग चरणों में मनाया जाता है। इसका प्रमुख आकर्षण है संस्कृत नाटक और शास्त्रीय नृत्य। सात दिन तक संस्कृत नाटकों और शास्त्रीय नृत्य का प्रदर्शन होता है। इसके अलावा देश भऱ के विद्वान संस्कृत साहित्य और कालिदास को लेकर शोध पत्रों का वाचन करते हैं। विश्वविद्यालयीन स्तर पर संस्कृत वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है जिसमें देश भर के संसकृत छात्र-छात्राएं भाग लेने आते हैं। इस वाद विवाद प्रतियोगिता के उच्च स्तर का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि किसी जमाने में इसमें प्रतियोगी की हैसियत से बाग लेने आने वाले छात्र आज किसी विश्वविद्यालय में संस्कृत के प्राध्यापक की हैसियत से इसमें निर्णायक की भूमिका में बैठे नजर आते हैं।र्तमान रूप में कालिदास समारोह का आरम्भ सन् १९५८ से हुआ। इसकी परिकल्पना स्वर्गीय पंण्डित सूर्यनारायण व्यास के द्वारा की गयी थी जो तीस के दशक से ही उज्जैन में “कालिदास जयन्ती” का आयोजन करते आ रहे थे। सन् १९७९ में मध्य प्रदेश सरकार ने उज्जैन में कालिदास अकादमी की स्थापना की जो विक्रम विश्वविद्यालय के साथ मध्य-प्रदेश के
कालिदास समारोह एक सांस्कृतिक-साहित्यिक सम्मेलन है जो भारत के मध्य प्रदेश राज्य के उज्जैनउज्जैन नगर में प्रतिवर्ष कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवप्रबोधिनी एकादशी) को आयोजित होता है।संस्कृति मंत्रालय के सहायता से इसे प्रतिवर्ष आयोजित करता है।