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भारत में मेडिकल साइंस की क्रांति: उज्जैन में बनेगी पहली यूरिन-आधारित कैंसर डिटेक्शन किट यूनिट, मुख्यमंत्री से मिली हरी झंडी; अक्टूबर 2025 तक होगी तैयार
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
भारत में मेडिकल साइंस के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति आने वाली है। अब सिर्फ यूरिन की कुछ बूंदें किट पर डालकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का शुरुआती चरण में ही पता लगाया जा सकेगा। यह किट एक साथ आठ प्रकार के कैंसर की पहचान करने में सक्षम होगी।
यह ऐतिहासिक उपलब्धि साउथ कोरिया की कंपनी ECDS ग्रुप के सहयोग से उज्जैन में संभव हो रही है। कंपनी ने मध्यप्रदेश में कैंसर डिटेक्शन किट की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने की योजना बनाई है, जिससे भारत को मेडिकल तकनीक के क्षेत्र में एक नई दिशा मिलेगी।
मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद मिली हरी झंडी, उज्जैन में बनेगी यूनिट
4 मार्च को साउथ कोरिया के 8 सदस्यीय प्रतिनिधि दल ने उज्जैन के विक्रम उद्योगपुरी में संभावित स्थल का निरीक्षण किया। इससे पहले, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भोपाल में कंपनी के निवेशकों की मुलाकात हुई थी। इस बैठक में मेडिकल उपकरणों, मेडिकल एआई, नैनो टेक्नोलॉजी, बायो पॉलीमर और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश की इच्छा जाहिर की गई।
MPIDC (मध्यप्रदेश इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) के निदेशक राजेश राठौड़ ने बताया कि उज्जैन में लगने वाली इस यूनिट का निर्माण अक्टूबर 2025 तक पूरा कर लिया जाएगा। यह अत्याधुनिक यूनिट 21 एकड़ भूमि पर बनेगी और इसमें कैंसर डिटेक्शन किट का उत्पादन किया जाएगा, जिसे भारत सहित दुनियाभर में भेजा जाएगा।
कैसे काम करेगी यह कैंसर डिटेक्शन किट?
ECDS ग्रुप के संस्थापक राजेश भारद्वाज के अनुसार, यह देश की पहली ऐसी किट होगी, जिससे कैंसर का शुरुआती चरण में ही पता चल सकेगा। अब तक भारत में ऐसी कोई किट उपलब्ध नहीं थी।
इस किट का उपयोग बहुत ही आसान और त्वरित होगा:
- पेशाब (यूरिन) की कुछ बूंदें इस किट पर डाली जाएंगी।
- कुछ ही मिनटों में यह किट कैंसर की संभावना का संकेत देगी।
- रिपोर्ट के आधार पर मरीज को आगे के परीक्षण और इलाज के लिए डॉक्टर से सलाह लेनी होगी।
8 प्रकार के कैंसर की पहचान करेगी यह किट
यह अत्याधुनिक किट कैंसर के 8 प्रकारों की पहचान करने में सक्षम होगी:
- ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर)
- स्टमक कैंसर (पेट का कैंसर)
- लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर)
- लिवर कैंसर (यकृत कैंसर)
- प्रोस्टेट कैंसर
- ब्लैडर कैंसर (मूत्राशय कैंसर)
- कोलोरेक्टल कैंसर (आंतों का कैंसर)
- पैंक्रिएटिक कैंसर (अग्न्याशय कैंसर)
वहीं, इस परियोजना से लगभग 480 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। उज्जैन पहले ही शिक्षा और आध्यात्मिकता का केंद्र रहा है, अब यह मेडिकल इनोवेशन के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण स्थान बना सकता है।