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मध्यप्रदेश में रावण दहन पर विवाद: युवा ब्राह्मण समाज ने मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचकर सौंपा ज्ञापन, प्रधानमंत्री और संघ प्रमुख को भी भेजा पत्र; कहा – – “विद्वान का नहीं, असली अपराधियों का दहन हो”!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
दशहरे पर होने वाले रावण दहन को लेकर इस बार मध्यप्रदेश में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि राज्य में रावण दहन पर रोक लगाई जाए। संगठन का कहना है कि यह परंपरा शास्त्रसम्मत नहीं है और इसे मनोरंजन और राजनीति का साधन बना दिया गया है।
ज्ञापन मुख्यमंत्री कार्यालय में सौंपा गया
समाज के पदाधिकारी और सदस्य उज्जैन स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने डिप्टी कलेक्टर राजेश बोरासी को ज्ञापन सौंपा। संगठन ने यह ज्ञापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत को भी भेजा है।
अपराधियों के पुतले क्यों नहीं?
संस्थापक अध्यक्ष महेश पुजारी ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब देश में निर्भया कांड जैसे घिनौने अपराध करने वाले, भ्रष्टाचार और अत्याचार फैलाने वाले अपराधी मौजूद हैं, तो उनके पुतले क्यों नहीं जलाए जाते? आखिर हर साल रावण का पुतला जलाकर ब्राह्मण समाज को ही क्यों कटघरे में खड़ा किया जाता है?
“रावण ब्राह्मण धर्म निभाने वाला विद्वान था”
महेश पुजारी ने आगे कहा कि रावण केवल खलनायक नहीं था, बल्कि वह वेद-पुराणों का विद्वान और ज्ञानी ब्राह्मण था। यही कारण है कि श्रीराम ने भी रावण को सम्मान देते हुए उसके आचार्यत्व में रामेश्वरम की स्थापना की और विजय का आशीर्वाद प्राप्त किया।
उन्होंने कहा – “रावण ने ब्राह्मण धर्म का पालन करते हुए अपने धर्म और कर्तव्य को निभाया, लेकिन आज समाज केवल सीता हरण की घटना को आधार बनाकर पूरे ब्राह्मण समुदाय का अपमान कर रहा है।”
क्या यह ब्राह्मण समाज को बदनाम करने की साजिश?
संगठन का आरोप है कि रावण दहन केवल परंपरा नहीं, बल्कि ब्राह्मण समाज की छवि खराब करने की साजिश बन चुका है। उनका कहना है कि श्रीलक्ष्मण द्वारा शूर्पणखा के नाक-कान काटने जैसी घटनाओं को कोई अधर्म नहीं मानता, लेकिन रावण को केवल एक घटना के आधार पर हर साल जलाया जाता है।
ब्राह्मण समाज की मांग
युवा ब्राह्मण समाज ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और संघ प्रमुख से अपील की है कि वे रावण दहन पर रोक लगाने का आदेश जारी करें और समाज को सम्मान दिलाएं। संगठन का कहना है कि दशहरा जैसे त्योहार पर अगर किसी का पुतला जलाना है, तो वह असली अपराधियों और अत्याचारियों का होना चाहिए, न कि एक विद्वान ब्राह्मण का।