- उज्जैन में तपिश का प्रकोप: 40-41°C पर अटका पारा, अगले 4 दिन में और बढ़ेगी गर्मी; स्वास्थ्य विभाग सतर्क, हीट मरीजों के लिए विशेष वार्ड तैयार
- सिंहस्थ 2028 की तैयारियों पर सख्ती: मुख्य सचिव ने कहा—समय से पहले पूरे हों काम, बारिश से पहले बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करें; मेडिसिटी, सड़क और पुल निर्माण की भी समीक्षा की
- महाकाल मंदिर में तड़के भस्म आरती: पंचामृत अभिषेक के बाद रजत चंद्र-त्रिशूल से सजा बाबा का दिव्य रूप, गूंजे जयकारे
- CM मोहन यादव के विजन को रफ्तार: विक्रम विश्वविद्यालय ने शुरू किया अभियान, फार्मा कंपनियों को जोड़ने और स्टूडेंट्स को स्किल्ड बनाने पर फोकस
- सिंहस्थ 2028 की तैयारी तेज: रेल से आने वाले श्रद्धालुओं की व्यवस्था पर फोकस, अधिकारियों ने किया स्टेशनों का निरीक्षण
अव्यवस्था: सरकारी स्कूलों का चार माह से जमा नहीं हुआ बिजली बिल
ललित जैन. उज्जैन:जिले के सरकारी स्कूल की व्यवस्था शायद भगवान भरोसे ही है। नया सत्र शुरू होने को मात्र दो दिन शेष रह गए हैं और अधिकांश स्कूलों में मूलभूत व्यवस्था तक के इंतजाम नहीं हैं। दर्जनों स्कूल में पीने का पानी भी नहीं है और जहां विद्युत कनेक्शन हंै वहां का महीनों से बिल ही नहीं भरा है। हालांकि सुकून वाली बात यह है कि अब शासन ने जिला शिक्षा विभाग को जल्द ही भुगतान का भरोसा दिलाया है।
जिले के अधिकांश स्कूलों में विद्युत कनेक्शन तो हो गया लेकिन सैकड़ों स्कूलों का चार माह से एक साल तक का बिल ही नहीं भरा गया। हालात यह हो गए हैं कि स्कूलों पर बिल का १५ से ३० हजार रुपए तक का बकाया हो गया। सूत्रों की मानें तो सभी स्कूलों के बकाया बिल को जोड़ लिया जाए तो राशि लाखों में पहुंच रही है। नतीजतन अब विद्युत कंपनी के कर्मचारी प्रतिमाह स्कूलों में बिल का तकादा करने पहुंच रहे हैं। प्रधान अध्यापक उन्हें विभाग को भेजे गए पत्र की प्रति देने को मजबूर हो रहे हंै। बावजूद विद्युत कंपनी के अधिकारी शासन के दबाव में कुछ बोलने से बच रहे हंै।
आठ स्कूलों पर दो लाख
स्कूलों पर कितना बिल बकाया होगा इसका उदाहरण नईसड़क झोन के अंतर्गत आने वाले आठ स्कूलों से लगाया जा सकता है। यहां महाराजवाड़ा १, २, ३, माधवगंज, दौलतगंज, नमकमंडी, महाकाल मैदान व हरिफाटक के स्कूलों पर १४ से २७ हजार रुपए तक का बिल बाकी है। यह राशि २.१७ लाख रुपए है। शहर के आठ झोन का बकाया और जोड़ दिया जाए तो राशि का अनुमान लगाया जा सकता है।
जिम्मेदार कौन
शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार पूर्व में बिजली बिल की राशि स्कूलों को ही भेज दी जाती थी। बाद में संकुलों को यह काम सौंप दिया गया लेकिन करीब एक साल से प्रधान अध्यापकों को ही यह नहीं पता कि बिल का भुगतान कौन और किस तरह से करेगा। यही वजह है कि वह हर बार विभाग को पत्र भेजने को मजबूर हंै।
इनका कहना
मुझे अब तक इस बात की जानकारी नहीं है। अब मालूम पड़ा है तो पता करता हूं कि कहां पर क्या स्थिति है।
– शशांक मिश्र, कलेक्टर
कहां कनेक्शन-कितना बाकी
खास बात यह है करीब सालभर से उत्पन्न इस स्थिति के बाद भी डीपीसी (जिला परियोजना समन्वयक) पीएस सोलंकी को ये नहीं पता कितने स्कूलों में कनेक्शन हैं और कितनी राशि बकाया है। उनके अनुसार कुछ स्कूलों का साल भर से बिल बकाया है, जबकि ग्रामीण क्षेत्र के १८३ स्कूलों में विधानसभा चुनाव के दौरान कनेक्शन होने के बाद से ही बिल नहीं भरा जा सका है। बकाया राशि की जानकारी मिलने पर ने सरकार जल्द ही भुगतान का कहा है।
पानी की परेशानी
जिले के कई स्कूलों में पीने के पानी की भी यही स्थिति है। शहर के स्कूलों में तो विद्यार्थी पानी की बोतल लेकर आते हैं लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों की स्थिति बदतर है। डीपीसी सोलंकी खुद स्वीकारते हैं कि कई स्कूलों में जलस्रोत सूख चुके हैं। फिलहाल विद्यार्थियों के लिए पीने के पानी की परेशानी है लेकिन वह यह नहीं बता सके कि स्कूल शुरू होने वाले हैं ऐसी स्थिति में समस्या का समाधान क्या है।