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तय दिन नहीं होने के बाद भी कांवडिय़ों की मांग पर मंदिर प्रशासन ने दिया प्रवेश
उज्जैन। श्रावण मास में भगवान महाकालेश्वर के दर्शनों की ललक हर भक्त में होती है। श्रद्धालु हर संभव प्रयास करते हैं कि किसी न किसी तरह भगवान के दर्शन हो जाएं भले ही उन्हें इसके लिये किसी भी हद तक क्यों न जाना पड़े। सोमवार को 10 हजार से अधिक कांवडिय़े तय दिन नहीं होने के बाद भी भगवान को जल अर्पित करने के लिये अड़ गये और उनकी मांग को मंदिर प्रशासन ने स्वीकार करते हुए रास्ते भी खोल दिये जिससे कांवडिय़ों की खुशी का ठिकाना न रहा।
महाकालेश्वर मंदिर में कांवड़ यात्रियों के लिये मंगलवार, बुधवार, गुरूवार, शुक्रवार को जल अर्पित करने के दिन तय हैं। इन दिनों में कांवडिय़ों को भस्मार्ती गेट से विशेष प्रवेश देकर भगवान को जल अर्पित करने की अनुमति दी जाती है, लेकिन इंदौर सहित आसपास के शहरों से सोमवार को करीब 10 हजार से अधिक कांवडिय़े भगवान को जल अर्पित करने की जिद पर अड़ गये। मंदिर के सुरक्षाकर्मियों, पुलिस जवानों व मंदिर प्रशासन के कर्मचारियों ने कावडिय़ों को बताया कि सोमवार को अलग से सुविधा का नियम नहीं है इस पर कावड़ यात्रियों ने नारे लगाना शुरू कर दिया जिसमें महाकाल के वास्ते, खोल दो सारे रास्ते, बम बम भोले जैसे उद्घोष हो रहे थे। मंदिर प्रशासन के अधिकारियों को जब कांवडिय़ों की संख्या लगातार बढऩे और प्रवेश की मांग पर अडऩे की जानकारी मिली तो उन्होंने भस्मार्ती गेट से कांवडिय़ों को प्रवेश देते हुए सभा मंडप के रास्ते मंदिर में प्रवेश दिया।
सबकी भावनाओं का
ध्यान रखना पड़ता है
महाकालेश्वर के दर्शन करने की मंशा सभी की होती है, कांवडिय़े अनेक किलोमीटर दूर से भगवान के लिये पवित्र नदियों का जल लेकर पैदल आते हैं, उनकी मांग अनुसार व्यवस्था में शिथिलता करते हुए उन्हें जल चढ़ाने की अनुमति प्रदान की गई।
दिलीप गरूड़, सहायक प्रशासक