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माधव कॉलेज को लेकर राजनीति हुई तेज
उज्जैन। माधव कॉलेज को जब से कालिदास कन्या महाविद्यालय में स्थानांतरित करने की खबर आई है। तब से शहर में युवाओं से लेकर राजनेतओं के बीच विवाद देखने को मिल रहा है। माधव कॉलेज स्थानांतरण विवाद का रूप ले चुका है। कॉलेज के छात्र इसे राजनीतिक ध्रुवीकरण का शिकार बता रहे है। जिससे इन्हें इनका भविष्य खतरे में नजर आ रहा है।
उच्च शिक्षा विभाग ने स्थानांतरण को लेकर कलेक्टर से अपना अभिमत से मांगा था। तब से शहर में चुनावी सरगर्मी और बढ़ गई है। जिसको लेकर कांगे्रस अब मैदान में कुच कर चुकी है। शुक्रवार को माधव कॉलेज बचाओ अभियान समिति की बैठक माधव कॉलेज परिसर में हुई। जिसमें समिति के सदस्यों ने निर्णय लिया है कि कॉलेज के विद्यार्थी के साथ कांग्रेस भी आंदोलन में शामिल होगी। जिसको लेकर आगे रणनीति बनाई जाएगी। साथ ही हस्ताक्षर अभियान भी चलाया जाएगा।
माधव कॉलेज की स्थापना सन् १८९० में हुई थी। जिसें स्थापित हुए १२८ वर्ष पूर्ण होने को आए हैं। माधव कॉलेज में करीब ४ हजार से अधिक विद्यार्थी पढ़ाई करते हंै। यहां शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों में से करीब १ हजार विद्यार्थी आसपास के गांव, शहरों से आते हैं। जिसका मुख्य कारण कॉलेज के पास में परिवहन व्यवस्था के लिए रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन एवं कॉलेज में पढ़ाई करने वाली छात्राओं की सुरक्षा के लिए पुलिस थाना की सुविधा पास में ही उपलब्ध हैं।
लेकिन १ सप्ताह पहले उच्च विभाग के द्वारा कलेक्टर से अभिमत मांगा गया था, कि क्यों न माधव कॉलेज को नवनिर्मित कालिदास कन्या भवन में स्थानांतरित कर दिया जाए। इसकी खबर जैसी शहर में फैली तभी से इसके स्थानांतरण को लेकर विरोध शुरू हो चुका है। कॉलेज के छात्र नेताओं ने कांग्रेस के नेताओं के साथ माधव कॉलेज बचाओ समिति की शुक्रवार को हुई बैठक में फैसला लिया गया कि अगर शासन इस फैसले को वापस नहीं लेता है, तो हम इसको लेकर सड़कों तक आंदोलन करेंगे। इसके साथ ही समिति द्वारा हस्ताक्षर अभियान भी चलाया जाएगा। बैठक में पूर्व विधायक कल्पना परूलेकर, अरुण वर्मा, योगेश शर्मा, चेतन यादव, रवि राय, हेमंतसिंह चौहान, असलम लाला, विवेक यादव आदि कांगे्रसजन के साथ कॉलेज के विद्यार्थी मौजूद थे।