आज होगा फैसला:महाकाल मंदिर समिति की बैठक आज, भस्मआरती में प्रवेश का फैसला होगा

आज होगा फैसला:महाकाल मंदिर समिति की बैठक आज, भस्मआरती में प्रवेश का फैसला होगा

महाकाल मंदिर समिति की सोमवार को होने वाली बैठक स्थगित हो गई है। यह बैठक अब मंगलवार सुबह 10.30 बजे कोठी स्थित बृहस्पति भवन में होगी। बैठक में महाकालेश्वर की भस्मआरती में श्रद्धालुओं को प्रवेश शुरू करने का फैसला होगा। माना जा रहा है कि समिति प्रवेश शुरू करने का निर्णय ले सकती है। इसके अलावा गर्भगृह में भी श्रद्धालुओं को प्रवेश पर मंथन होगा। पुजारियों-पुरोहितों का मत है कि भस्मआरती में यदि प्रवेश दिया…

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IRCTC की पिलग्रिम ट्रेन:14 फरवरी से राजकोट से पांच ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए चलेगी ट्रेन, 3 टूरिस्ट ट्रेनें भी चलाई जाएंगी

IRCTC की पिलग्रिम ट्रेन:14 फरवरी से राजकोट से पांच ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए चलेगी ट्रेन, 3 टूरिस्ट ट्रेनें भी चलाई जाएंगी

इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईआरसीटीसी) फरवरी में दो पिलग्रिम स्पेशल टूरिस्ट ट्रेन और मार्च में दो भारत दर्शन ट्रेन चलाने जा रही है। चारों ट्रेन राजकोट से चलेंगी और लौटकर वहीं जाएंगी। इन ट्रेनों में यात्रियों के लिए चाय, नाश्ता, दोपहर व रात का भोजन, ठहरने और घूमने के लिए बस का खर्च भी किराए में शामिल होगा। इसके अलावा किराए में ही यात्रियों के चार लाख का दुर्घटना बीमा भी रहेगा।…

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भूमिपूजन पर प्रशासन का भूचाल

भूमिपूजन पर प्रशासन का भूचाल

वार्ड क्रमांक-3 में एक दिन पहले हुए भूमिपूजन पर सत्ताधारी नेताओं की मनमानी पर प्रशासनिक अधिकारियों का भूचाल शुरू हो गया है। सत्तापक्ष से जुड़े नेताओं ने रहवासियों के साथ मिलकर भूमिपूजन कर दिया। जबकि न तो नगर पालिका परिषद् से इसकी अनुमति ली गई और न ही स्थानीय प्रशासन को कोई सूचना दी गई। पूरे कार्यक्रम के दौरान स्थानीय प्रशासन और नपा के अधिकारी भी अनजान बने रहे लेकिन अखबारों में भूमिपूजन का समाचार…

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सकट चौथ का व्रत कब है, जानें पूजा विधि

सकट चौथ का व्रत कब है, जानें पूजा विधि

पंचांग के अनुसार 31 जनवरी को सकट चतुर्थी का पर्व है. सकट चौथ का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है. इस पर्व को सकट चौथ, तिलकुटा चौथ, संकटा चौथ, माघी चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी के नामों से भी जाना जाता है. 31 जनवरी का दिन धार्मिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है. इस दिन सकट चौथ का पर्व है. इस पर्व पर भगवान गणेश जी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. इस दिन व्रत रखने का…

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महाकाल मंदिर

महाकाल मंदिर

देशभर के बारह ज्योतिर्लिंगों में ‘महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग’ का अपना एक अलग महत्व है। महाकाल मंदिर दक्षिण मुखी होने से भी इस मंदिर का अधिक महत्व है महाकाल मंदिर विश्व का एक मात्र ऐसा शिव मंदिर है जहाँ दक्षिणमुखी शिवलिंग प्रतिष्ठापित है । यह स्वयंभू शिवलिंग है । जो बहुत जाग्रत है । इसी कारण केवल यहाँ तड़के ४ बजे भस्म आरती करने का विधान है । यह प्रचलित मान्यता थी कि श्मशान मे कि ताजी…

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गोपाल मंदिर

गोपाल मंदिर

द्वारकाधीश गोपाल मंदिर उज्जैन नगर का दूसरा सबसे बड़ा मंदिर है।गोपाल मंदिर, उज्जैन के प्रसिद्ध स्थानों में से एक है तथा यह मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है। इस मंदिर को द्वारकाधीश मंदिर भी कहा जाता है। गोपाल मंदिर का निर्माण दौलत राव सिंधिया की धर्मपत्नी वायजा बाई ने संवत 1901 में कराया था जिसमें मूर्ति की स्थापना संवत 1909 में की गई। इस मान से ईस्वी सन 1844 में निर्माण 1852 में मूर्ति की…

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इस्कॉन मंदिर

इस्कॉन मंदिर

सन 2006 में सफेद संगमरमर से बना यह मंदिर काफी भव्य है। यहाँ मुरली मनोहर और उनकी प्रेमिका राधा की बेहद खूबसूरत प्रतिमा है। इसके अलावा कृष्ण-बलराम और कृष्ण-रुक्म‍िणी की मूर्तियाँ भी बरबस आपका ध्यान आकर्षित कर लेती हैं। इस मंदिर की रूपरेखा और इस्कॉन मंदिर के प्रवर्तक पूज्यपाद गुरुजी की मनोहारी मूर्ति भी यहाँ स्थापित की गई है। हर इस्कॉन मंदिर की तरह यहाँ तुलसी बगीचा है, जिससे तुलसी की माला बनाई जाती है।…

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चिंतामणि गणेश मंदिर

चिंतामणि गणेश मंदिर

चिंतामणिगणेश या चिंतामणि गणेश उज्जैन में एक प्राचीन भगवान गणेश के पवित्र मंदिर है. चिंतामणि गणेश उज्जैन के सबसे बड़ा गणेश मंदिर है. यह तनाव से राहत ‘का मतलब है. के रूप में यह गणेश का मंदिर है, लोगों को हर नए उद्यम शुरू करने के लिए गणेश का आशीर्वाद लेने. इस मंदिर शिप्रा नदी के उस पार फतेहाबाद रेलवे लाइन पर बनाया गया है. खुद के जन्म – इस मंदिर में गणेश मूर्ति  स्वयंभू माना…

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काल भैरव मंदिर

काल भैरव मंदिर

यह मंदिर श्री शीप्राजी के तट पर स्थित है। यह मंदिर भगवान कालभैरव का है जो कि अत्यंत प्राचीन एवं चमत्कारिक है।   यहाँ पर श्री कालभैरवजी की मूर्ति जो कि मदिरा पान करती है एवं सभी को आश्चर्यचकित कर देती है। मदिरा का पात्र पुजारी द्वारा भगवान के मुंह पर लगा दिया जाता है एवं मंत्रों का उच्चारण किया जाता है, देखते ही देखते मूर्ति सारी मदिरा पी जाती है। मूर्ति के सामने झूलें में…

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गढ़कालिका मंदिर

गढ़कालिका मंदिर

गढ़कालिका मंदिर,मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में स्थित है। कालजयी कवि कालिदास गढ़ कालिका देवी के उपासक थे। कालिदास के संबंध में मान्यता है कि जब से वे इस मंदिर में पूजा-अर्चना करने लगे तभी से उनके प्रतिभाशाली व्यक्तित्व का निर्माण होने लगा। कालिदास रचित ‘श्यामला दंडक’ महाकाली स्तोत्र एक सुंदर रचना है। ऐसा कहा जाता है कि महाकवि के मुख से सबसे पहले यही स्तोत्र प्रकट हुआ था। यहाँ प्रत्येक वर्ष कालिदास समारोह के…

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